महाराष्ट्र के किसी भी घर में, किसी भी मंदिर में सुबह की पहली आरती हो या शाम की अंतिम एक नाम की गूँज हर जगह सुनाई देती है: श्री स्वामी समर्थ।
Shri Swami Samarth Aarti Lyrics सिर्फ पारंपरिक बोल नहीं हैं। ये करोड़ों भक्तों की जीवित आस्था है जो 19वीं सदी से लेकर आज 2025 तक बिना रुके गाई जाती है। अक्कलकोट मठ से लेकर मुंबई के छोटे-छोटे घरों तक, Swami Samarth Aarti हर पूजा का अनिवार्य हिस्सा है।
हिंदी भाषी भक्तों के लिए यहाँ सम्पूर्ण 3 आरतियाँ और 1 प्रार्थना दी गई हैं मराठी मूल, हिंदी भावानुवाद और English Transliteration के साथ।
Overview: Song और Creators का परिचय
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| आरती संग्रह | श्री स्वामी समर्थ महाराज आरती संग्रह |
| Song Title (मुख्य) | जय जय सद्-गुरु स्वामी समर्था (Jay Jay Sadguru Swami Samartha) |
| Singer | पारंपरिक कोई एक गायक नहीं; अक्कलकोट मठ के कीर्तनकार एवं भक्त गायक |
| Composer / Lyricist | पारंपरिक अक्कलकोट स्वामी समर्थ भक्ति परंपरा (19वीं सदी) |
| Album | पारंपरिक मराठी आरती संग्रह; कोई व्यावसायिक एल्बम नहीं |
| Language | मराठी (Marathi) देवनागरी |
| Genre | Devotional / Spiritual / Marathi Bhakti Sangeet |
| Tradition | दत्तात्रेय सम्प्रदाय, महाराष्ट्र संत परंपरा |
| Deity | श्री स्वामी समर्थ महाराज, अक्कलकोट |
| Verified Source | Maharashtra Times Aarti Sangrah |
श्री स्वामी समर्थ कौन थे?
श्री स्वामी समर्थ महाराज अक्कलकोट के स्वामी 19वीं सदी के दत्तात्रेय परंपरा के महान संत थे। सोलापुर जिले के अक्कलकोट में लगभग 1856 से उनका निवास रहा। उनका सबसे प्रसिद्ध वचन:
“भिऊ नकोस, मी तुझ्या पाठीशी आहे” “डरो मत, मैं सदा तुम्हारे साथ हूँ”
यह सभी आरतियाँ किसी फिल्म या व्यावसायिक एल्बम की रचनाएँ नहीं हैं। ये पारंपरिक मराठी भक्ति-रचनाएँ हैं जो पीढ़ियों से गाई जाती आई हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer)
Shri Swami Samarth Aarti के यहाँ प्रस्तुत सम्पूर्ण बोल महाराष्ट्र की पारंपरिक मराठी भक्ति विरासत और अक्कलकोट स्वामी समर्थ परंपरा के क्लासिकल आरती संग्रह का अंग हैं। ये बोल केवल भक्तिपूर्ण श्रद्धा, आध्यात्मिक अध्ययन और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए प्रस्तुत किए गए हैं। ये पारंपरिक रचनाएँ महाराष्ट्र की संत परंपरा की सामूहिक सांस्कृतिक और भक्ति विरासत से संबंधित हैं।
आरती १ मुख्य आरती: Shri Swami Samarth Aarti Lyrics in Marathi (मूल)
(सर्वाधिक प्रसिद्ध हर घर और मंदिर में गाई जाती है)
।।धृपद।।
जय जय सद्-गुरु स्वामी समर्था, आरती करु गुरुवर्या रे।
अगाध महिमा तव चरणांचा, वर्णाया मति दे यारे ॥धृ॥
अक्कलकोटी वास करुनिया, दाविली अघटित चर्या रे।
लीलापाशे बध्द करुनिया, तोडिले भवभया रे ॥१॥
यवन पूछिले स्वामी कहा है, अक्कलकोटी पहा रे।
समाधी सुख ते भोगुन बोले, धन्य स्वामीवर्या रे ॥२॥
जाणिसे मनीचे सर्व समर्था, विनवू किती भव हरा रे।
इतुके देई दीनदयाळा, नच तव पद अंतरा रे ॥३॥
जय जय सद्-गुरु स्वामी समर्था, आरती करु गुरुवर्या रे ॥
आरती १ Jay Jay Sadguru Swami Samarth Aarti: English Transliteration
Refrain:
Jay Jay Sadguru Swami Samartha, Aarti Karu Guruvarya Re.
Agadh Mahima Tav Charanancha, Varnaya Mati De Yaare. ॥Dhru॥
Verse 1:
Akkalkoti Vaas Karuniya, Davili Aghatit Charya Re.
Leelapashe Baddh Karuniya, Todile Bhavabhaya Re. ॥1॥
Verse 2:
Yavan Puchile Swami Kaha Hai, Akkalkoti Paha Re.
Samaadhi Sukh Te Bhogun Bole, Dhanya Swamivarya Re. ॥2॥
Verse 3:
Janise Maniche Sarva Samartha, Vinavu Kiti Bhav Hara Re.
Ituke Dei Deenadayala, Nach Tav Pad Antara Re. ॥3॥
Jay Jay Sadguru Swami Samartha, Aarti Karu Guruvarya Re. ॥
आरती १ Swami Samarth Aarti Lyrics in Hindi (भावानुवाद + English Translation)
धृपद का अर्थ: हे सद्गुरु स्वामी समर्था, जय हो! हम आपकी आरती करते हैं। आपके चरणों की महिमा अगाध है हमें उसे वर्णन करने की बुद्धि दीजिए।
Victory to you, O Sadguru Swami Samartha! We perform your aarti. The glory of your feet is immeasurable grant us the wisdom to describe it.
पहले पद का अर्थ: अक्कलकोट में निवास करके आपने अद्भुत लीलाएँ दिखाईं। अपनी लीलाओं के बंधन में बाँधकर आपने भव-भय को तोड़ दिया।
Residing in Akkalkot, you revealed miraculous deeds. By binding us in your divine play, you freed us from the fear of worldly existence.
दूसरे पद का अर्थ: एक मुस्लिम भक्त ने पूछा स्वामी कहाँ हैं? उत्तर मिला अक्कलकोट जाओ। समाधि का सुख भोगकर वे बोले धन्य हैं ऐसे स्वामी!
A Muslim devotee asked: where is Swami? The answer: go to Akkalkot. Having experienced the bliss of Samadhi, he declared Blessed is this great Swami!
तीसरे पद का अर्थ: हे समर्था, आप मन की सब जानते हैं। कितनी विनती करें भव-मुक्ति के लिए? बस इतना दीजिए, हे दीनदयाल आपके चरणों से कभी दूर न हों।
O Samartha, you know everything in our heart. How much shall we pray for liberation? Grant us this alone, O compassionate one may we never be far from your feet.
आरती २ Jaidev Jaidev Shri Swami Samartha: Lyrics in Marathi
(दूसरी प्रसिद्ध आरती सायंकालीन पूजा में विशेष)
जयदेव जयदेव श्री स्वामी समर्था
आरती ओवाळू चरणी ठेवूनिया माथा ॥
जयदेव जयदेव… ॥
छेली खेडेग्रामी तू अवतरलासी,
जगदुध्दारासाठी राया तू फिरसी।
भक्त वत्सल खरा तू एक होसी,
म्हणूनी शरण आलो तुझिया चरणांसी ॥
जयदेव जयदेव… ॥
त्रैगुण परब्रम्ह तुझा अवतार,
याची काय वर्णू लीला पामर।
शेषादीक शिणले नलगे त्या पार,
तुजसी अर्पण केली आपली ही काया,
शरणागता तारी तू स्वामीराया ॥
जयदेव जयदेव… ॥
अघटित लीला करुनी जडमूढ उध्दरीले,
किर्ती ऐकुनी कानी चरणी मी लोळे।
चरण प्रसाद मोठा मज हे अनुभवले,
तुझ्या सूता नलगे चरणावेगळे ॥
जयदेव जयदेव… ॥
आरती २ English Transliteration (Jaidev Jaidev)
Jaidev Jaidev Shri Swami Samartha,
Aarti Ovaloo Charani Thevuniya Matha. ॥
Jaidev Jaidev…॥
Cheli Khede Grami Tu Avatarlasi,
Jagdudhharasathi Raya Tu Phirasi.
Bhakta Vatsal Khara Tu Ek Hosi,
Mhununi Sharan Alo Tujhiya Charanansi. ॥
Jaidev Jaidev…॥
Traigun Parabrahma Tuza Avatar,
Yachi Kay Varnu Lila Pamar.
Sheshadik Shinale Nalage Tya Par,
Tujasi Arpon Keli Aapali Hi Kaya,
Sharanaagata Tari Tu Swamiraya. ॥
Jaidev Jaidev…॥
Aghatit Lila Karuni Jadmudha Uddharile,
Kirti Eikuni Kani Charani Mi Lole.
Charan Prasad Motha Maj He Anubhavle,
Tujhya Suta Nalage Charanavegle. ॥
Jaidev Jaidev…॥
आरती २ Hindi Meaning (भावानुवाद)
टेक: जयदेव जयदेव हे श्री स्वामी समर्था! हम आपके चरणों में माथा टेककर आरती करते हैं।
पहला पद: आपने छोटे-छोटे गाँव-कस्बों में अवतार लिया। जगत के उद्धार के लिए, हे राया, आप विचरते रहे। आप ही सच्चे भक्त-वत्सल हैं इसीलिए हम आपके चरणों में शरण आए।
दूसरा पद: त्रिगुण से परे परब्रह्म का आपका यह अवतार इसकी लीलाएँ हम जैसे अधम कैसे वर्णन करें? शेषनाग भी वर्णन करते-करते थक गए। हमने अपना यह शरीर आपको समर्पित कर दिया शरणागत की रक्षा करें, हे स्वामीराया!
तीसरा पद: आपने अद्भुत लीलाएँ करके जड़-मूढ़ों का भी उद्धार किया। आपकी कीर्ति सुनकर मैं आपके चरणों में लोट जाता हूँ। आपके चरण-प्रसाद की महत्ता मैंने स्वयं अनुभव की है। आपके बच्चे को चरणों के अलावा कुछ नहीं चाहिए।
आरती ३ Swami Samarth Aarti Lyrics in Marathi (तीसरी आरती)
(दिगंबर स्वरूप की आरती विशिष्ट उपासना शैली)
आरती ओवाळू श्री सदगुरू स्वामी समर्था।
स्वरूप दिगंबर आजानुबाहु भव्यकाय नाथा – दिव्यकाय नाथा ॥धृ॥
हृदय निरांजनी शुद्ध प्रेमधृति भवाच्या वाती।
भजनानंद प्रकाश देउनी उजळल्या ज्योती ॥१॥
सर्वस्वापर्ण नैवधाशी ठेविलेचि पुढती।
सन्मति, सदधृति, सतकृती सदगति प्रसाद धा हाती ॥२॥
आरती ३ English Transliteration
Aarti Ovaloo Shri Sadguru Swami Samartha.
Swaroop Digambar Aajanubaahu Bhavyakaya Natha – Divyakaya Natha. ॥Dhru॥
Hruday Niranjani Shuddha Prem Dhruti Bhavachya Vati.
Bhajananand Prakash Deuni Ujalhalya Jyoti. ॥1॥
Sarvasvarpan Naivedhashi Thevilechhi Pudhati.
Sanmati, Sadadhruiti, Satkruti Sadagati Prasad Dha Hati. ॥2॥
आरती ३ Hindi Meaning (भावानुवाद)
धृपद: हम श्री सद्गुरु स्वामी समर्थ की आरती ओवाळते हैं। दिगंबर स्वरूप, लंबी भुजाओं वाले, भव्यकाय और दिव्यकाय नाथ!
We perform the aarti of Shri Sadguru Swami Samartha the one of Digambar form, with arms reaching to the knees, magnificent and divine.
पहला पद: हृदय-रूपी दीपक में शुद्ध प्रेम की बाती जली है। भजन के आनंद का प्रकाश देकर ज्योतियाँ प्रज्वलित हो उठी हैं।
In the lamp of the heart, the wick of pure love burns. The light of devotional bliss has illuminated all the flames within.
दूसरा पद: सर्वस्व समर्पण का नैवेद्य आपके सामने रखा है। सन्मति, सद्बुद्धि, सत्कर्म और सद्गति का प्रसाद प्रदान करें।
The offering of complete surrender is placed before you. Grant the blessings of right thought, right resolve, right action, and right liberation.
४. प्रार्थना Sadguru Natha Haat Jodito: Lyrics in Marathi
(यह आरती के साथ गाई जाने वाली प्रार्थना है)
|| सदगुरु नाथा हात जोडीतो प्रार्थना ||
सदगुरु नाथा हात जोडीतो अंत नको पाहु।
ऊकलुनी मनीचे हितगुज सारे वद कवणा दावू ॥धृ०॥
निशीदिनी श्रमसी मम हितार्थ तू किती तुज शीण देऊ।
ह्रदयी वससी परी नच दिससी कैसे तुज पाहु ॥१॥
प्रार्थना English Transliteration
Sadguru Natha Haat Jodito Prarthana.
Sadguru Natha Haat Jodito Ant Nako Pahu.
Ukaluni Maniche Hitguj Sare Vad Kavana Davu. ॥Dhru॥
Nishidini Shramasi Mam Hitartha Tu Kiti Tuj Shin Deu.
Hrudayi Vasasi Pari Nach Disasi Kaise Tuj Pahu. ॥1॥
प्रार्थना Hindi Meaning (भावानुवाद)
धृपद: हे सद्गुरु नाथ, हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूँ मेरी परीक्षा मत लो। मन का यह हितगुज (अंतरंग बात) खोलकर किसे दिखाऊँ?
O Sadguru Natha, I fold my hands in prayer do not test me to the end. This innermost secret of my heart to whom shall I reveal it?
पहला पद: रात-दिन तू मेरे हित के लिए श्रम करता है हे प्रभु, मैं तुझे कितना थकाऊँ? तू हृदय में निवास करता है, फिर भी दिखता नहीं कैसे तुझे देखूँ?
Day and night you labor for my welfare how much shall I tire you, O Lord? You reside within my heart, yet remain unseen how shall I behold you?
शब्दों का आध्यात्मिक महत्व क्यों यह आरतियाँ इतनी प्रभावशाली हैं?
“अगाध महिमा तव चरणांचा, वर्णाया मति दे यारे” विनम्रता का दर्शन
मुख्य Shri Swami Samarth Aarti का यह धृपद एक असाधारण कथन है। भक्त स्तुति करने से पहले ही स्वीकार करता है “मैं आपकी महिमा वर्णन करने में असमर्थ हूँ स्वयं आप ही मुझे वह शक्ति दीजिए।”
यह आत्म-समर्पण का पहला और सबसे उच्च स्तर है।
“लीलापाशे बध्द करुनिया, तोडिले भवभया” आध्यात्मिक विरोधाभास
पहले पद में एक गहरा Paradox है। बाँधना और मुक्त करना दोनों एक साथ। गुरु की लीला में बँध जाना ही संसार के भय से मुक्त हो जाना है। यह महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा का मूल सूत्र है।
“यवन पूछिले” समता का ऐतिहासिक संदेश
Jay Jay Sadguru Swami Samarth Aarti के दूसरे पद में एक मुस्लिम भक्त (“यवन”) का उल्लेख है। 19वीं सदी की रचना में यह पंक्ति क्रांतिकारी थी स्वामी के दरबार में जाति और धर्म का कोई भेद नहीं था।
“ह्रदयी वससी परी नच दिससी” आत्मा की पुकार
प्रार्थना की यह पंक्ति सबसे मर्मस्पर्शी है। “तू मेरे हृदय में है, फिर भी मुझे नहीं दिखता।” यह हर उस साधक की व्यथा है जो आध्यात्मिक खोज में है। इस एक पंक्ति में पूरी भक्ति-यात्रा समाई है।
चारों आरतियों की तुलना कौन सी कब गाएँ?
| आरती | प्रमुख पंक्ति | कब / किसलिए |
|---|---|---|
| आरती १ (मुख्य) | Jay Jay Sadguru Swami Samartha | दैनिक पूजा, गृह-आरती, सर्वाधिक प्रचलित |
| आरती २ (Jaidev) | Jaidev Jaidev Shri Swami Samartha | सायंकालीन आरती, समर्पण-भाव के लिए |
| आरती ३ (दिगंबर) | Aarti Ovaloo Shri Sadguru | विशेष पूजा, स्वामी के दिव्य स्वरूप की उपासना |
| प्रार्थना | Sadguru Natha Haat Jodito | आरती के अंत में, व्यक्तिगत प्रार्थना के रूप में |
संगीत रचना और गायन प्रदर्शन
Swami Samarth Aarti किसी व्यावसायिक संगीत एल्बम की रचना नहीं यह जीवित मौखिक परंपरा (Living Oral Tradition) है।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| राग | भैरवी, कीर्तन शैली शांत और भावपूर्ण |
| संरचना | धृपद + पद पुनरावृत्ति मेडिटेटिव प्रभाव देती है |
| गति | धीमी से मध्यम ध्यान और एकाग्रता के लिए |
| वाद्य यंत्र | हारमोनियम, तबला, टाळ (झाँझ), शंख |
| विशेष अवसर | स्वामी जयंती (चैत्र शुक्ल द्वादशी), गुरुपूर्णिमा, गुरुवार |
? FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: Swami Samarth Aarti Lyrics in Hindi में कहाँ मिलेंगे?
इस लेख में सभी 3 आरतियाँ हिंदी भावानुवाद सहित दी गई हैं मराठी मूल, हिंदी अर्थ और English Transliteration। यह सबसे पूर्ण संग्रह है।
Q2: Jay Jay Sadguru Swami Samarth Aarti और Jaidev Jaidev में क्या अंतर है?
दोनों अलग-अलग आरतियाँ हैं। “Jay Jay Sadguru” (आरती १) दैनिक गृह-पूजा में सर्वाधिक गाई जाती है। “Jaidev Jaidev” (आरती २) समर्पण और शरणागति के भाव पर केंद्रित है। दोनों अक्कलकोट मठ में नियमित रूप से गाई जाती हैं।
Q3: Swami Samarth Aarti Lyrics in Marathi का सही उच्चारण कैसे करें?
हिंदी भाषियों के लिए “ओवाळू” में “ळ” मराठी का विशेष वर्ण है (retroflex L)। “चर्या” में “र्य” स्पष्ट उच्चारित करें। “शेषादीक” का “दी” दीर्घ है। अभ्यास से उच्चारण सुधरता है।
Q4: यह आरतियाँ किसने रची?
ये 19वीं सदी की पारंपरिक रचनाएँ हैं अक्कलकोट स्वामी समर्थ भक्ति परंपरा से। कोई एकल आधुनिक कवि या संगीतकार नहीं है। ये महाराष्ट्र की संत परंपरा की सामूहिक विरासत हैं।
Q5: Swami Samarth Aarti कब और कितनी बार गाएँ?
प्रतिदिन प्रातः और सायं। गुरुवार को विशेष महत्व है। अक्कलकोट मठ में निश्चित समय पर आरती होती है। घर में किसी भी पूजा के अंत में यह आरती गा सकते हैं।
Q6: “दिगंबर आजानुबाहु” का क्या अर्थ है?
तीसरी आरती में “दिगंबर” का अर्थ है जो दिशाओं को ही वस्त्र मानते हैं अर्थात् निर्लिप्त, संन्यासी। “आजानुबाहु” का अर्थ है जिनकी भुजाएँ घुटनों तक लंबी हैं यह दिव्य पुरुष का लक्षण माना जाता है।
Q7: प्रार्थना “सदगुरु नाथा हात जोडीतो” आरती का हिस्सा है या अलग?
यह आरती के बाद गाई जाने वाली अलग प्रार्थना है। अक्कलकोट मठ में आरती संग्रह के अंत में इसे शामिल किया जाता है। यह भक्त की व्यक्तिगत पुकार है आरती के औपचारिक बोल समाप्त होने के बाद की अंतरंग प्रार्थना।
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