Wednesday, May 13

कुछ भजन मंदिर को भर देते हैं, और कुछ भजन आत्मा को। Thali Bhar Ke Layi Re Khichdo Lyrics दूसरी श्रेणी में आता है। अगर आपने कभी राजस्थान में किसी सत्संग में बैठकर यह सुना है मिट्टी के फर्श पर, तेल के दीपक की रोशनी में, धूप की सुगंध के बीच तो यह भजन उस पल की आवाज़ है।

मुकेश बागड़ा की आवाज़ में गाया यह भजन न तो भव्य है, न नाटकीय। इसकी ताकत उसकी सादगी में है। एक जाट किसान परिवार की बेटी एक थाली खीचड़ो और उसके ऊपर घी की बाटकी लेकर आती है और श्याम धणी को खाने का निमंत्रण देती है। बस इतनी सी बात है। और यही सब कुछ है।

Table of Contents

भजन और रचनाकारों के बारे में (Overview)

विवरण जानकारी
Song Title थाली भरकर लायी रे खीचड़ो (Thali Bhar Ke Layi Re Khichdo)
Singer मुकेश बागड़ा (Mukesh Bagda)
Genre राजस्थानी कृष्ण भजन / Devotional Folk
Language राजस्थानी (मारवाड़ी बोली)
Album / Film Standalone Devotional Bhajan (Non-film)
Composer पारंपरिक लोक रचना (Traditional Folk)
Lyricist सोहन लाल लोहकार (Sohan Lal Lohkar)
देवता श्याम / कृष्ण (Shyam / Krishna)
Theme निर्गुण भक्ति – सच्चा, सरल और निःस्वार्थ प्रेम

थाली भरकर लाई खीचड़ो लिरिक्स | Thali Bhar Ke Layi Re Khichdo Lyrics In Hindi

॥ मुखड़ा ॥

थाली भरकर लायी रे खीचड़ो,
उपर घी की बाटकी,
जीमो म्हारा श्याम धणी,
जिमावै बेटी जाट की॥

॥ अंतरा 1 ॥

बापू म्हारो गांव गवेलो,
ना जाणे कद आवैलो,
ऊका भरोसे बैठयो रहयो तो,
भूखो ही रह जावैलो,
आज जिमाऊं तैने रे खीचड़ो,
काल राबड़ी छाछ की,
जीमो म्हारा श्याम धणी,
जिमावै बेटी जाट की॥

॥ अंतरा 2 ॥

बार बार मंदिर ने जुड़ती,
बार बार मैं खोलती,
कईया कोनी जीमे रे मोहन,
करडी करड़ी बोलती,
तू जीमे तो जद मैं जिमूं,
मानू ना कोई लाट की,
जीमो म्हारो श्याम धणी,
जिमावै बेटी जाटी की,
जीमो म्हारा श्याम धणी,
जिमावै बेटी जाट की॥

॥ अंतरा 3 ॥

परदो भूल गई सांवरियो,
परदो फेर लगायो जी,
धावलियो की ओट बैठ के,
श्याम खीचड़ौ खायो जी,
भोला भाला भगता सू,
सांवरिया कइया आंट की,
जीमो म्हारा श्याम धणी,
जिमावै बेटी जाट की॥

॥ अंतरा 4 ॥

भक्ति हो तो करमा जैसी,
सावरियों घर आवेलो,
सोहन लाल लोहकार प्रभु का,
हरष हरष गुण गावेलो,
सांचो प्रेम प्रभु से हो तो,
मूरत बोले काठ की,
जीमो म्हारा श्याम धणी,
जिमावै बेटी जाट की॥

॥ मुखड़ा (समापन) ॥

थाली भरकर लायी रे खीचड़ो,
उपर घी की बाटकी,
जीमो म्हारा श्याम धणी,
जिमावै बेटी जाट की॥

Thali Bhar Ke Layi Re Khichdo Lyrics in English – लिप्यंतरण और अनुवाद

मुखड़ा (Refrain)

लिप्यंतरण: Thaali bharkar laayi re khichdo, Upar ghee ki baataki, Jeemo mhaara Shyam dhani, Jimaave beti Jaat ki.

Translation: I have brought a plate filled with khichdi, With a bowl of pure ghee on top, Please eat, my Lord Shyam, A daughter of the Jat community is offering you this meal.

हिंदी अर्थ: मैं थाली भरकर खीचड़ो लाई हूँ, ऊपर से शुद्ध घी की कटोरी, खाइए मेरे श्याम धणी, एक जाट की बेटी आपको खिला रही है।

अंतरा 1

लिप्यंतरण: Baapu mhaaro gaanv gavelo, Na jaane kad aavailo, Ooka bharose baithyo rahyo to, Bhooko hi rah jaavailo, Aaj jimaaoon taine re khichdo, Kaal raabdi chhaach ki, Jeemo mhaara Shyam dhani, Jimaave beti Jaat ki.

Translation: My father has gone to the village, Who knows when he will return, If I kept waiting on his account, I would have remained hungry, So today I feed you khichdi, my Lord, And tomorrow it shall be raabdi (sweet porridge) with buttermilk, Please eat, my Lord Shyam, A daughter of the Jat community is offering you this meal.

हिंदी अर्थ: मेरे पिता गाँव गए हैं, पता नहीं कब लौटेंगे, अगर उनके इंतज़ार में बैठी रहती, तो भूखी ही रह जाती, इसलिए आज आपको खीचड़ो खिलाती हूँ, कल राबड़ी और छाछ भी बनाऊँगी, खाइए मेरे श्याम धणी, एक जाट की बेटी आपको खिला रही है।

अंतरा 2

लिप्यंतरण: Baar baar mandir ne judti, Baar baar main kholti, Kaaiya koni jeeme re Mohan, Kardi kardi bolti, Tu jeeme to jad main jimoon, Maanoon na koi laat ki, Jeemo mhaaro Shyam dhani, Jimaave beti Jaati ki, Jeemo mhaara Shyam dhani, Jimaave beti Jaat ki.

Translation: Again and again I joined my hands at the temple, Again and again I opened the door, Yet you didn’t eat, O Mohan, I kept calling you with earnest words, Only when you eat will I eat I care for no one’s command otherwise, Please eat, my Lord Shyam, A daughter of the Jat community is offering you this meal.

हिंदी अर्थ: बार-बार मंदिर में हाथ जोड़ती हूँ, बार-बार किवाड़ खोलती हूँ, हे मोहन, आप खाते क्यों नहीं, कठोर शब्दों में पुकारती हूँ, जब आप खाएंगे तभी मैं खाऊँगी, किसी बड़े की बात नहीं मानूँगी इसमें, खाइए मेरे श्याम धणी, एक जाट की बेटी आपको खिला रही है।

अंतरा 3

लिप्यंतरण: Pardo bhool gayi saanvaryo, Pardo pher lagaayo ji, Dhaawaliye ki ot baith ke, Shyam khichdau khaayo ji, Bhola bhaala bhagata soo, Saanvariya kaiya aant ki, Jeemo mhaara Shyam dhani, Jimaave beti Jaat ki.

Translation: Shyam (the dark-hued Lord) had forgotten his veil (social convention), But then again he pulled it back, Taking shelter behind the white-walled house, Shyam quietly ate the khichdi, With simple and innocent devotees, What secrets does the dark Lord keep? Please eat, my Lord Shyam, A daughter of the Jat community is offering you this meal.

हिंदी अर्थ: साँवरियाजी पर्दा भूल गए थे, फिर से पर्दा लगा लिया, सफेद दीवार की ओट में बैठकर, श्याम ने चुपके से खीचड़ो खाया, भोले-भाले भक्तों के साथ, साँवरिया कितने रहस्यमय हैं, खाइए मेरे श्याम धणी, एक जाट की बेटी आपको खिला रही है।

अंतरा 4

लिप्यंतरण: Bhakti ho to Karma jaisi, Saavaryon ghar aavelo, Sohan Lal Lohkaar Prabhu ka, Harash harash gun gaavelo, Saancho prem Prabhu se ho to, Moorat bole kaath ki, Jeemo mhaara Shyam dhani, Jimaave beti Jaat ki.

Translation: If devotion is like Karma’s (a devotee’s name) devotion, The Lord himself comes home, Sohan Lal Lohkar joyfully sings praises of the Lord, If love for the Lord is truly genuine, Even a wooden idol speaks, Please eat, my Lord Shyam, A daughter of the Jat community is offering you this meal.

हिंदी अर्थ: भक्ति हो तो करमा जैसी, साँवरिया खुद घर आ जाते हैं, सोहन लाल लोहकार प्रभु के गुण, हर्षित होकर गाते हैं, अगर प्रभु से सच्चा प्रेम हो, तो काठ की मूर्ती भी बोल उठती है, खाइए मेरे श्याम धणी, एक जाट की बेटी आपको खिला रही है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

थाली भरकर लायी रे खीचड़ो भजन के लिरिक्स इसके मूल कलाकारों और रचनाकारों गायक मुकेश बागड़ा और गीतकार सोहन लाल लोहकार की संपत्ति हैं। ये लिरिक्स केवल भक्ति सराहना, सांस्कृतिक दस्तावेज़ीकरण और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए साझा किए गए हैं। कृपया मूल भजन को अन्य प्लेटफॉर्म पर देखकर कलाकारों का समर्थन करें।

इन लिरिक्स में इतनी गहराई क्यों है?

जो लोग Thali Bhar Ke Layi Re Khichdo Lyrics in Hindi या थाली भरकर लाई खीचड़ो लिरिक्स खोज रहे हैं वे सिर्फ शब्द नहीं ढूंढ रहे, वे उस भाव को छूना चाहते हैं जो इन शब्दों में भरा है।

धर्म यहाँ रसोई की भाषा में बोलता है। बेटी किसी बड़े मंदिर में नहीं जाती, कोई विस्तृत पूजा नहीं करती। जो घर में है वही लाती है खीचड़ो, घी, राबड़ी। और यही प्रभु स्वीकार करते हैं। इसीलिए यह भजन काम करता है।

तीसरा अंतरा सबसे ज़्यादा प्रभावशाली है। श्याम का दीवार की ओट में छुपकर खीचड़ो खाना और फिर जल्दी से पर्दा लगाना यह एक अद्भुत काव्य-चित्र है। यह ईश्वर को एक ऐसे रूप में दिखाता है जो लोकिक भी है और दिव्य भी जो अपने सरल भक्तों के बीच चुपके से आता है।

अंतिम पंक्ति पूरे भजन का सार है। सांचो प्रेम प्रभु से हो तो, मूरत बोले काठ की यह सिर्फ काव्य नहीं, यह राजस्थानी भक्ति परंपरा का मूल सिद्धांत है। सच्चे प्रेम से काठ की मूर्ति भी जीवंत हो उठती है।

संगीत रचना और मुकेश बागड़ा की आवाज़

मुकेश बागड़ा इस भजन को उस तरह गाते हैं जैसे कोई अपनी माँ को याद कर रहा हो बिना नाटकीयता के, बिना अतिरिक्त अलंकरण के। धुन मारवाड़ी लोक लय पर आधारित है जो इसे प्रदर्शन कम और प्रार्थना ज़्यादा बनाती है।

धणी, जिमावै, गवेलो, बाटकी जैसे शब्द सिर्फ बोली के हिस्से नहीं ये उस मिट्टी की खुशबू हैं जहाँ से यह भजन उगा है। राजस्थान के गाँवों में रहने वाले श्रोता इन शब्दों में अपना पूरा जीवन देखते हैं।

अंतिम अंतरे में सोहन लाल लोहकार का नाम आना एक पारंपरिक राजस्थानी काव्य परंपरा है जिसमें गीतकार अपना नाम भजन की अंतिम पंक्तियों में बुन देता है यह एक तरह की काव्य दस्तखत है।

इस भजन की भक्ति परंपरा

यह भजन सहज भक्ति की उस महान धारा से जुड़ता है जहाँ दिखावे से ज़्यादा ईमानदारी मायने रखती है। सुदामा की चावल की पोटली, विदुर की पत्नी का केले का छिलका, मीरा का एकतारा यह सब उसी श्रेणी के उदाहरण हैं।

थाली भरकर लाई खीचड़ो (Thali Bhar Ke Layi Re Khichdo) भी इसी कड़ी में आता है। जाट की बेटी कोई विधिवत पूजा नहीं कर रही वह किसी प्रिय को खाना खिला रही है, और वह प्रिय ईश्वर है।

यही कारण है कि यह भजन राजस्थान की सीमाओं से बाहर भी गूँजता है। खीचड़ो, जाट परिवार, गाँव गए पिता ये सब स्थानीय रंग हैं जो भजन को असली बनाते हैं। लेकिन “तू जीमे तो जद मैं जिमूं” यह भाव किसी एक जाति या प्रदेश का नहीं, यह हर उस इंसान का है जिसने कभी किसी को खुद से ज़्यादा चाहा हो।

? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: थाली भरकर लाई रे खीचड़ो किसने गाया है?

यह भजन मुकेश बागड़ा ने गाया है, जो राजस्थानी लोक भजनों के एक प्रमुख गायक हैं।

प्रश्न 2: थाली भरकर लाई रे खीचड़ो का अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है “मैं थाली भरकर खीचड़ो लाई हूँ” एक जाट समुदाय की बेटी श्याम (कृष्ण) को साधारण भोजन की सच्ची भेंट दे रही है।

प्रश्न 3: क्या यह भजन किसी फिल्म से है?

नहीं। यह एक स्वतंत्र राजस्थानी भक्ति भजन है, किसी फिल्म या व्यावसायिक एल्बम का हिस्सा नहीं।

प्रश्न 4: इस भजन की भाषा कौन सी है?

यह मुख्यतः राजस्थानी (मारवाड़ी बोली) में है, जिसमें हिंदी का भी प्रभाव है।

प्रश्न 5: भजन में सोहन लाल लोहकार कौन हैं?

सोहन लाल लोहकार इस भजन के गीतकार हैं जिन्होंने अंतिम अंतरे में अपना नाम डाला यह राजस्थानी भक्ति काव्य की एक पारंपरिक परिपाटी है।

प्रश्न 6: “मूरत बोले काठ की” का क्या मतलब है?

इसका शाब्दिक अर्थ है “काठ (लकड़ी) की मूर्ति भी बोल उठती है।” यह भजन का केंद्रीय संदेश है सच्चे प्रेम से ईश्वर किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं।

प्रश्न 7: थाली भरकर लाई रे खीचड़ो कहाँ सुनें?

यह भजन YouTube पर उपलब्ध है। “Thali Bharkar Layi Re Khichdo Mukesh Bagda” खोजकर मूल संस्करण सुन सकते हैं।

प्रश्न 8: भजन में खीचड़ो का क्या महत्व है?

खीचड़ो (खिचड़ी) एक साधारण और सात्विक भोजन है। भक्ति परंपरा में यह विनम्र और सच्ची भेंट का प्रतीक है दिखावे की नहीं, दिल की।

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